apne un doston ke liye jinse mil paana ab utna sahaj nahin..
कैसा अजीब ये लम्हा है,
हम भीड़ में हैं और तनहा हैं!!
कैसे सहे दुनिया के सितम,
दिल तो नन्हा बच्चा है !!
लाखों तारों के बीच जैसे,
आकाश में रहता चंदा है!!
तारों में भी चमक नहीं,
ये कैसा गोरखधंधा है??
हिम्मत न हार ऐ मेरे दिल,
तू तो अल्लाह का बंदा है!!
कैसी मुश्किल है आन पड़ी,
सबका हाल equally गन्दा है!! :P


